सामाजिक बदलावों व सरोकारों से जुड़ी होती हैं प्रकाश झा की फिल्में

‘फेसेस आफ्टर द स्टॉर्म’,’दामुल’,’मृत्यदंड’ जैसी फिल्मों ने बताया कि आज़ादी के बाद अब भी सब कुछ नही बदला। रूढ़ियों व पाखंड से भरे समाज की कहानी को कैनवास पर उतारने वाले प्रकाश झा को सिनेमा के एक अलग अध्याय के रूप में देखा जा सकता है

फ़िल्म दामुल से बतौर निर्माता व निर्देशक हिंदी फिल्म जगत में अपनी शुरुआत करने वाले प्रकाश झा काफ़ी दिनों बाद मुख्य अभिनेता के रूप में नज़र आएंगे। प्रकाश झा को हिंदी फिल्म जगत में एक उम्दा लेखक,निर्देशक व निर्माता माना जाता है।उन्होंने भारतीय सिनेमा को बेहतरीन फिल्में दी हैं ,जिसके लिए उन्हें कई बार नेशनल अवार्ड भी दिया जा चुका है।

फ़िल्म ‘दामुल’ में प्रकाश झा ने बंधुवा मज़दूरों की कहानी व उनकी सम्वेदनाओं को दिखाकर भारतीय सिनेमा में एक नया अध्याय जोड़ा। अब जबकि सिनेमा कमर्शियल होता जा रहा है उस समय में इस तरह की फिल्मों को लाना आज के आर्थिक युग मे एक समाज सेवा जैसा ही है। असल मे सिनेमा का उद्देश्य यही होना चाहिए कि ज्यादातर समाज अपने आपको,अपनी वर्तमान की दिक्कतों को सिनेमा में देख सके। वंचित व शोषित तबके के समाज को पर्दे पर लाकर प्रकाश झा सिने जगत के एक मजबूत व सशक्त निर्देशक व निर्माता बन गए।

इसके बाद गंगाजल,मृत्युदंड,अपहरण,राजनीति,चक्रव्यूहआरक्षण जैसी फिल्में बनाकर प्रकाश झा ने यह भी सिद्ध किया कि सिनेमा सिर्फ चकाचौंध व मस्ती के लिए नही बल्कि समाज मे चल रही परेशानियों व मुद्दों के लिए भी है,जिससे जनता सीधा सीधा अपने आप को निहारती है। सिनेमा इसी मायने में समाज का दर्पण कहा जाता है।

प्रकाश झा ने हमेशा समाज के सुख दुख व मानवीय संवेदनाओं को सिनेमा पर्दे पर उतारा है और एक बार फिर वो अब अभिनेता के रूप में ‘
मट्टो की साइकिल‘ फ़िल्म में दिखने जा रहे हैं।

एम.गनी द्वारा निर्देशित इस फ़िल्म में मज़दूर वर्ग की व्यथा है। बहुत से मज़दूर जिन्हें रोजमर्रा दूर शहर में जाकर काम करना पड़ता है। थके हारे पहुंचने के बाद सर पर दुगुना बोझ और फिर जो कुछ जेब मे मिला,लेकर एक सपना संजोते अपने घर वापस। कभी कभी देर पहुंचने पर ठेकेदारों की गालियां व साथ ही पगार में कटौती।

     फ़िल्म में मट्टो की साइकिल कैसे उसकी सुख दुख की साथी है। उससे मट्टो की जो भावना जुड़ी है,उसी  को केंद्र में रखकर यह फ़िल्म बनाई गई। साइकिल के इर्द गिर्द घूमती इस कहानी में सामाजिक व ग्रामीण परिवेश की भावना,उनके जीवन शैली व इमोशन्स को भरा गया है। यह फ़िल्म आगामी 16 सितम्बर को सिनेमा घरों में रिलीज की जा रही है। जिसमे प्रकाश झा ने 

मट्टो का किरदार निभाया है। उनके साथ अनिता चौधरी,डिम्पी मिश्रा व अन्य कलाकार भी नज़र आएंगे।

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